गोरखनाथ चालीसा एक भक्ति गीत है जो महायोगी गोरखनाथ की महिमा और उनके आशीर्वाद का बखान करता है। गोरखनाथ जी, जिनका संबंध नाथ सम्प्रदाय से है, भारतीय धार्मिक परंपरा में एक महान योगी और संत माने जाते हैं। वे विशेष रूप से योग, ध्यान, और सिद्धि के प्रतीक माने जाते हैं। गोरखनाथ के बारे में कहा जाता है कि उन्होंने अपने कठिन साधना और योग के माध्यम से न केवल भौतिक शरीर की शक्तियों को प्राप्त किया, बल्कि वे आत्मज्ञान में भी उच्च स्थान पर पहुंचे।
गोरखनाथ जी की पूजा और भक्ति का उद्देश्य आत्मिक उन्नति और भौतिक कष्टों से मुक्ति प्राप्त करना है। गोरखनाथ चालीसा के माध्यम से भक्तों को गोरखनाथ जी की कृपा प्राप्त होती है, जो उनके जीवन में शांति, समृद्धि, और सफलता लाती है।
गोरखनाथ जी का महत्व
गोरखनाथ जी का महत्व हिंदू धर्म में अत्यधिक है। वे विशेष रूप से नाथ सम्प्रदाय के संस्थापक माने जाते हैं, जो भारतीय योग और साधना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। गोरखनाथ जी ने अपने जीवन में योग, तपस्या, और सिद्धियों के माध्यम से अनेक लोगों को आत्मज्ञान की दिशा में मार्गदर्शन दिया। उनकी पूजा से मानसिक शांति, शारीरिक शक्ति, और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।
गोरखनाथ जी की कृपा से जीवन के कष्टों और परेशानियों से छुटकारा मिलता है। उनकी पूजा और चालीसा का नियमित पाठ जीवन में सकारात्मक बदलाव लाता है और आत्मविश्वास बढ़ाता है।
गोरखनाथ चालीसा का अर्थ
गोरखनाथ चालीसा के श्लोक गोरखनाथ जी के अद्भुत गुणों, उनकी साधना, और उनके भक्तों पर उनके आशीर्वाद का बखान करते हैं। इसमें गोरखनाथ जी की शक्तियों, उनकी सिद्धियों, और उनके प्रभाव का वर्णन है।
इस चालीसा में भक्त गोरखनाथ जी से निम्नलिखित आशीर्वाद की प्रार्थना करते हैं:
- आध्यात्मिक उन्नति: गोरखनाथ जी के आशीर्वाद से व्यक्ति को आत्मज्ञान की प्राप्ति होती है और वह मानसिक शांति और संतुलन में रहता है।
- सिद्धि प्राप्ति: गोरखनाथ जी की पूजा से व्यक्ति को सिद्धि प्राप्त होती है, जिससे वह जीवन में सफलता और शांति पाता है।
- शारीरिक और मानसिक बल: गोरखनाथ जी की कृपा से व्यक्ति में शारीरिक शक्ति और मानसिक संतुलन आता है, जिससे वह जीवन की कठिनाइयों का सामना करने में सक्षम होता है।
- कष्टों से मुक्ति: गोरखनाथ चालीसा का पाठ करने से जीवन के सभी प्रकार के कष्ट और संकट दूर होते हैं।
गोरखनाथ चालीसा के लाभ
- आध्यात्मिक उन्नति: गोरखनाथ चालीसा का पाठ व्यक्ति को आध्यात्मिक उन्नति की दिशा में मार्गदर्शन करता है। यह उसे मानसिक शांति और संतुलन प्रदान करता है।
- सिद्धि प्राप्ति: गोरखनाथ जी की कृपा से व्यक्ति को योग, ध्यान, और साधना में सिद्धि प्राप्त होती है। वह अपनी समस्याओं का समाधान आसानी से ढूंढ सकता है।
- शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य: गोरखनाथ चालीसा का नियमित पाठ मानसिक तनाव को कम करता है और शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार लाता है। यह व्यक्ति को शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाता है।
- जीवन में सफलता और समृद्धि: गोरखनाथ जी के आशीर्वाद से व्यक्ति के जीवन में समृद्धि, सफलता, और सुख-शांति का वास होता है।
- कष्टों से मुक्ति: गोरखनाथ चालीसा के पाठ से व्यक्ति को जीवन के कष्टों और परेशानियों से मुक्ति मिलती है। यह चालीसा मानसिक शांति और आत्मविश्वास का संचार करती है।
गोरखनाथ चालीसा का पाठ कैसे करें?
गोरखनाथ चालीसा का पाठ विशेष रूप से मंगलवार, शुक्रवार, और शनिवार को किया जाता है, क्योंकि ये दिन गोरखनाथ जी की पूजा के लिए शुभ माने जाते हैं। हालांकि, इसे किसी भी दिन और किसी भी समय किया जा सकता है।
पाठ करते समय, एक स्वच्छ स्थान पर बैठकर गोरखनाथ जी की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक जलाएं। फिर ताजे फूल अर्पित करें और पूरी श्रद्धा के साथ चालीसा का पाठ करें। पाठ करते समय ध्यान केंद्रित करें और “ॐ गोरखनाथ महाराज की जय” का मंत्र भी जप सकते हैं।
गोरख चालीसा पढ़ने के फायदे
गुरू गोरखनाथ जी की चालीसा पढ़ना और सुनना उन लोगों के लिए ज्यादा फायदेमंद है, जो अपने जीवन में पूर्ण सुख प्राप्त करना चाहते हैं। ये चालीसा गुरु गोरखनाथ की दिव्य सुरक्षा प्रदान करता है। गोरखनाथ चालीसा पढ़ने पर बाबा गोरखनाथ जातक को स्वास्थ्य, धन, समृद्धि, सौभाग्य और अपने जीवन में जो कुछ भी चाहता है वो सब कुछ देते है। तो किसी को अपने जीवन में पूर्ण शांति और सुख चाहिए उसे हर रोज गोरखनाथ जी की चालीसा का पाठ करना चाहिए
गोरखनाथ चालीसा के लिरिक्स
दोहा- गणपति गिरिजा पुत्र को, सिमरूँ बारम्बार।
हाथ जोड़ विनती करूँ, शारद नाम अधार।।
चौपाई- जय जय जय गोरख अविनाशी, कृपा करो गुरुदेव प्रकाशी।
जय जय जय गोरख गुणज्ञानी, इच्छा रूप योगी वरदानी।।
अलख निरंजन तुम्हरो नामा, सदा करो भक्तन हित कामा।
नाम तुम्हारा जो कोई गावे, जन्म जन्म के दुःख नशावे।।
जो कोई गोरक्ष नाम सुनावे, भूत पिशाच निकट नहीं आवे।
ज्ञान तुम्हारा योग से पावे, रूप तुम्हार लख्या ना जावे।।
निराकार तुम हो निर्वाणी, महिमा तुम्हरी वेद बखानी।
घट घट के तुम अन्तर्यामी, सिद्ध चौरासी करें प्रणामी।।
भस्म अङ्ग गले नाद विराजे, जटा सीस अति सुन्दर साजे।
तुम बिन देव और नहीं दूजा, देव मुनी जन करते पूजा।
चिदानन्द सन्तन हितकारी, मङ़्गल करे अमङ़्गल हारी।
पूरण ब्रह्म सकल घट वासी, गोरक्षनाथ सकल प्रकासी।।
गोरक्ष गोरक्ष जो कोई ध्यावे, ब्रह्म रूप के दर्शन पावे।
शङ़्कर रूप धर डमरू बाजे, कानन कुण्डल सुन्दर साजे।।
नित्यानन्द है नाम तुम्हारा, असुर मार भक्तन रखवारा।
अति विशाल है रूप तुम्हारा, सुर नर मुनि जन पावं न पारा।।
दीन बन्धु दीनन हितकारी, हरो पाप हम शरण तुम्हारी।
योग युक्ति में हो प्रकाशा, सदा करो सन्तन तन वासा।।
प्रातःकाल ले नाम तुम्हारा, सिद्धि बढ़े अरु योग प्रचारा।
हठ हठ हठ गोरक्ष हठीले, मार मार वैरी के कीले।।
चल चल चल गोरक्ष विकराला, दुश्मन मान करो बेहाला।
जय जय जय गोरक्ष अविनासी, अपने जन की हरो चौरासी।।
अचल अगम हैं गोरक्ष योगी, सिद्धि देवो हरो रस भोगी।
काटो मार्ग यम की तुम आई, तुम बिन मेरा कौन सहाई।।
अजर अमर है तुम्हरो देहा, सनकादिक सब जोहहिं नेहा।
कोटि न रवि सम तेज तुम्हारा, है प्रसिद्ध जगत उजियारा।।
योगी लखें तुम्हारी माया, पार ब्रह्म से ध्यान लगाया।
ध्यान तुम्हारा जो कोई लावे, अष्ट सिद्धि नव निधि घर पावे।।
शिव गोरक्ष है नाम तुम्हारा, पापी दुष्ट अधम को तारा।
अगम अगोचर निर्भय नाथा, सदा रहो सन्तन के साथा।।
शङ़्कर रूप अवतार तुम्हारा, गोपीचन्द भर्तृहरि को तारा।
सुन लीजो गुरु अरज हमारी, कृपा सिन्धु योगी ब्रह्मचारी।।
पूर्ण आस दास की कीजे, सेवक जान ज्ञान को दीजे।
पतित पावन अधम अधारा, तिनके हेतु तुम लेत अवतारा।।
अलख निरंजन नाम तुम्हारा, अगम पंथ जिन योग प्रचारा।
जय जय जय गोरक्ष भगवाना, सदा करो भक्तन कल्याना।।
जय जय जय गोरक्ष अविनाशी, सेवा करें सिद्ध चौरासी।
जो पढ़ही गोरक्ष चालीसा, होय सिद्ध साक्षी जगदीशा।।
बारह पाठ पढ़े नित्य जोई, मनोकामना पूरण होई।
और श्रद्धा से रोट चढ़ावे, हाथ जोड़कर ध्यान लगावे।।
दोहा
सुने सुनावे प्रेमवश, पूजे अपने हाथ मन इच्छा सब कामना, पूरे गोरक्षनाथ।
अगम अगोचर नाथ तुम, पारब्रह्म अवतार।
कानन कुण्डल सिर जटा, अंग विभूति अपार।
सिद्ध पुरुष योगेश्वरों, दो मुझको उपदेश।
हर समय सेवा करूँ, सुबह शाम आदेश।
निष्कर्ष
गोरखनाथ चालीसा एक शक्तिशाली भक्ति गीत है, जो न केवल मानसिक शांति और शारीरिक स्वास्थ्य प्रदान करता है, बल्कि यह आध्यात्मिक उन्नति और सिद्धि प्राप्त करने का भी एक प्रभावी साधन है। गोरखनाथ जी के आशीर्वाद से जीवन में हर प्रकार की सकारात्मकता आती है और व्यक्ति को हर कठिनाई का सामना करने की शक्ति मिलती है।
गोरखनाथ चालीसा का पाठ करें और गोरखनाथ जी के आशीर्वाद से अपने जीवन को समृद्ध और खुशहाल बनाएं।