झूलेलाल चालीसा एक धार्मिक भक्ति गीत है, जो भगवान झूलेलाल की महिमा और उनके आशीर्वाद का बखान करता है। भगवान झूलेलाल Sindhi समुदाय के सर्वोत्तम देवता माने जाते हैं, जो विशेष रूप से पानी, आशीर्वाद और उधारदाता के रूप में पूजे जाते हैं। उनकी पूजा और भक्ति के माध्यम से लाखों भक्त अपनी समस्याओं का समाधान और मानसिक शांति प्राप्त करते हैं।
भगवान झूलेलाल का महत्व
भगवान झूलेलाल Sindhi संस्कृति और हिंदू धर्म में अत्यधिक श्रद्धा प्राप्त हैं। उनका जन्म कथा बहुत प्रसिद्ध है, जिसमें उन्हें सिंधु नदी के किनारे एक बच्चे के रूप में प्रकट होते हुए देखा गया था। उन्होंने जीवन के संकटों और मुसीबतों से उबारने के लिए भक्तों को सदैव मार्गदर्शन दिया।
झूलेलाल भगवान को विशेष रूप से जल, वर्षा और नदी के देवता के रूप में पूजा जाता है। वे अपने भक्तों को हर संकट और मुसीबत से उबारते हैं और उन्हें मानसिक शांति, सुख, समृद्धि, और आशीर्वाद देते हैं।
भगवान झूलेलाल के बारे में मान्यता है कि वे सदैव अपने भक्तों के साथ रहते हैं, उन्हें हर संकट से बाहर निकालते हैं और उनके जीवन में शांति और समृद्धि का वास करते हैं। उनका आशीर्वाद पाने के लिए भक्त झूलेलाल चालीसा का पाठ करते हैं, जो उन्हें सकारात्मक ऊर्जा, बल और सफलता प्रदान करता है।
झूलेलाल चालीसा का अर्थ
झूलेलाल चालीसा में भगवान झूलेलाल के गुणों का वर्णन किया गया है। इसमें उनकी महिमा, उनके दिव्य कार्यों और उनके भक्तों पर कृपा का उल्लेख है। इस चालीसा के श्लोकों के माध्यम से भक्त भगवान झूलेलाल से निम्नलिखित आशीर्वाद की प्रार्थना करते हैं:
- सभी कष्टों से मुक्ति: भगवान झूलेलाल के आशीर्वाद से जीवन के सभी दुखों और कष्टों से मुक्ति मिलती है।
- धन, संपत्ति और समृद्धि: झूलेलाल जी के आशीर्वाद से घर में समृद्धि और धन का वास होता है।
- मानसिक शांति: चालीसा का पाठ व्यक्ति को मानसिक शांति और संतुलन प्रदान करता है।
- सिद्धि और सफलता: भगवान झूलेलाल के आशीर्वाद से हर कार्य में सफलता और सिद्धि प्राप्त होती है।
झूलेलाल चालीसा के लाभ
- कष्टों से मुक्ति: झूलेलाल चालीसा का नियमित पाठ करने से व्यक्ति को जीवन के सभी कष्टों और समस्याओं से मुक्ति मिलती है। यह भक्तों को हर मुसीबत से बाहर निकलने का मार्गदर्शन करता है।
- धन और समृद्धि: भगवान झूलेलाल की पूजा और चालीसा का पाठ घर में समृद्धि, सुख और समृद्ध जीवन की प्राप्ति के लिए किया जाता है।
- मानसिक शांति और संतुलन: यह चालीसा मानसिक तनाव को कम करती है और शांति और संतुलन प्रदान करती है। यह व्यक्ति को हर स्थिति में सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखने की शक्ति प्रदान करती है।
- आध्यात्मिक उन्नति: झूलेलाल चालीसा के पाठ से व्यक्ति की आध्यात्मिक उन्नति होती है, जिससे वह अपने जीवन को एक नई दिशा में बदल सकता है।
- सिद्धि और सफलता: झूलेलाल जी के आशीर्वाद से कार्यों में सफलता और सिद्धि प्राप्त होती है। यह चालीसा व्यक्ति को जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में सफलता प्राप्त करने के लिए मार्गदर्शन प्रदान करती है।
झूलेलाल चालीसा का पाठ कैसे करें?
झूलेलाल चालीसा का पाठ विशेष रूप से मंगलवार, शनिवार, और रविवार को किया जाता है। हालांकि, इसे किसी भी दिन और किसी भी समय किया जा सकता है।
पाठ करते समय, एक स्वच्छ स्थान पर बैठकर भगवान झूलेलाल की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक जलाएं। फिर ताजे फूल अर्पित करें और चालीसा का पाठ पूरी श्रद्धा और ध्यान से करें। पाठ के दौरान, भगवान झूलेलाल के गुणों और शक्तियों पर ध्यान केंद्रित करें और “जय झूलेलाल” का मंत्र भी जप सकते हैं।
झूलेलाल चालीसा लिरिक्स
झूलेलाल चालीसा एक ऐसा स्तोत्र है जो भगवान झूलेलाल की महिमा का गुणगान करता है , जो सिंधी समुदाय के आराध्य देव माने जाते हैं। झूलेलाल को जल देवता और वरुण देवता का अवतार माना जाता है। जो भी भक्त झूलेलाल चालीसा का पाठ करते हैं उन्हें साहस, आत्मविश्वास, प्राप्त होता है और समस्याओं से मुक्ति भी मिलती है। इस चालीसा के प्रभाव से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है
झूलेलाल चालीसा दोहा
जय जय जल देवता, जय ज्योति स्वरूप ।
अमर उडेरो लाल जय, झुलेलाल अनूप ॥
झूलेलाल चालीसा चौपाई
रतनलाल रतनाणी नंदन ।
जयति देवकी सुत जग वंदन ॥
दरियाशाह वरुण अवतारी ।
जय जय लाल साईं सुखकारी ॥
जय जय होय धर्म की भीरा ।
जिन्दा पीर हरे जन पीरा ॥
संवत दस सौ सात मंझरा ।
चैत्र शुक्ल द्वितिया भगऊ वारा ॥
ग्राम नसरपुर सिंध प्रदेशा ।
प्रभु अवतरे हरे जन कलेशा ॥
सिन्धु वीर ठट्ठा राजधानी ।
मिरखशाह नऊप अति अभिमानी ॥
कपटी कुटिल क्रूर कूविचारी ।
यवन मलिन मन अत्याचारी ॥
धर्मान्तरण करे सब केरा ।
दुखी हुए जन कष्ट घनेरा ॥
पिटवाया हाकिम ढिंढोरा ।
हो इस्लाम धर्म चाहुँओरा ॥
सिन्धी प्रजा बहुत घबराई ।
इष्ट देव को टेर लगाई ॥
वरुण देव पूजे बहुंभाती ।
बिन जल अन्न गए दिन राती ॥
सिन्धी तीर सब दिन चालीसा ।
घर घर ध्यान लगाये ईशा ॥
गरज उठा नद सिन्धु सहसा ।
चारो और उठा नव हरषा ॥
वरुणदेव ने सुनी पुकारा ।
प्रकटे वरुण मीन असवारा ॥
दिव्य पुरुष जल ब्रह्मा स्वरुपा ।
कर पुष्तक नवरूप अनूपा ॥
हर्षित हुए सकल नर नारी ।
वरुणदेव की महिमा न्यारी ॥
जय जय कार उठी चाहुँओरा ।
गई रात आने को भौंरा ॥
मिरखशाह नऊप अत्याचारी ।
नष्ट करूँगा शक्ति सारी ॥
दूर अधर्म, हरण भू भारा ।
शीघ्र नसरपुर में अवतारा ॥
रतनराय रातनाणी आँगन ।
खेलूँगा, आऊँगा शिशु बन ॥
रतनराय घर ख़ुशी आई ।
झुलेलाल अवतारे सब देय बधाई ॥
घर घर मंगल गीत सुहाए ।
झुलेलाल हरन दुःख आए ॥
मिरखशाह तक चर्चा आई ।
भेजा मंत्री क्रोध अधिकाई ॥
मंत्री ने जब बाल निहारा ।
धीरज गया हृदय का सारा ॥
देखि मंत्री साईं की लीला ।
अधिक विचित्र विमोहन शीला ॥
बालक धीखा युवा सेनानी ।
देखा मंत्री बुद्धि चाकरानी ॥
योद्धा रूप दिखे भगवाना ।
मंत्री हुआ विगत अभिमाना ॥
झुलेलाल दिया आदेशा ।
जा तव नऊपति कहो संदेशा ॥
मिरखशाह नऊप तजे गुमाना ।
हिन्दू मुस्लिम एक समाना ॥
बंद करो नित्य अत्याचारा ।
त्यागो धर्मान्तरण विचारा ॥
लेकिन मिरखशाह अभिमानी ।
वरुणदेव की बात न मानी ॥
एक दिवस हो अश्व सवारा ।
झुलेलाल गए दरबारा ॥
मिरखशाह नऊप ने आज्ञा दी ।
झुलेलाल बनाओ बन्दी ॥
किया स्वरुप वरुण का धारण ।
चारो और हुआ जल प्लावन ॥
दरबारी डूबे उतराये ।
नऊप के होश ठिकाने आये ॥
नऊप तब पड़ा चरण में आई ।
जय जय धन्य जय साईं ॥
वापिस लिया नऊपति आदेशा ।
दूर दूर सब जन क्लेशा ॥
संवत दस सौ बीस मंझारी ।
भाद्र शुक्ल चौदस शुभकारी ॥
भक्तो की हर आधी व्याधि ।
जल में ली जलदेव समाधि ॥
जो जन धरे आज भी ध्याना ।
उनका वरुण करे कल्याणा ॥
झूलेलाल चालीसा दोहा
चालीसा चालीस दिन पाठ करे जो कोय ।
पावे मनवांछित फल अरु जीवन सुखमय होय ॥
॥ ॐ श्री वरुणाय नमः ॥
निष्कर्ष
झूलेलाल चालीसा भगवान झूलेलाल के आशीर्वाद से जीवन में शांति, सुख, समृद्धि, और सफलता प्राप्त करने का एक प्रभावी साधन है। यह चालीसा न केवल व्यक्ति के कष्टों से मुक्ति दिलाती है, बल्कि उसे मानसिक शांति, आत्मविश्वास और आध्यात्मिक उन्नति भी प्रदान करती है।
झूलेलाल चालीसा का पाठ करें और भगवान झूलेलाल के आशीर्वाद से अपने जीवन को खुशहाल और समृद्ध बनाएं।