नर्मदा चालीसा एक भक्तिपूर्ण गीत है, जो माँ नर्मदा की महिमा, उनके आशीर्वाद और उनके प्रति श्रद्धा का प्रतीक है। माँ नर्मदा को भारत की पवित्र नदियों में से एक माना जाता है और उन्हें जीवनदायिनी तथा पापों को धोने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है। नर्मदा नदी का महत्व धार्मिक दृष्टिकोण से बहुत अधिक है, और भक्तगण उनकी पूजा से शांति, सुख, समृद्धि और कष्टों से मुक्ति की प्राप्ति करते हैं।
माँ नर्मदा का महत्व
माँ नर्मदा को हिन्दू धर्म में विशेष स्थान प्राप्त है। उनकी पूजा से न केवल भौतिक सुख-समृद्धि मिलती है, बल्कि यह भक्तों को मानसिक शांति और आत्मिक उन्नति भी प्रदान करती है। नर्मदा नदी के किनारे स्थित पवित्र तीर्थ स्थल, जैसे कि ओंकारेश्वर, महेश्वर, और नर्मदा परिक्रमा में लाखों भक्तों की आस्था जुड़ी हुई है।
नर्मदा नदी का मानना है कि वह एक तटस्थ नदी है, जो हर किसी के पापों को धो देती है। उनका आशीर्वाद पाने के लिए भक्त नर्मदा चालीसा का पाठ करते हैं, जो जीवन को शांति, समृद्धि और सुख से भर देता है।
नर्मदा चालीसा का अर्थ
नर्मदा चालीसा में माँ नर्मदा के अद्भुत गुणों और उनके द्वारा प्रदान किए गए आशीर्वाद का वर्णन किया गया है। यह चालीसा माँ नर्मदा की स्तुति करती है और उनके द्वारा दिए गए दिव्य वरदानों की महिमा का बखान करती है। भक्त इस चालीसा के माध्यम से माँ नर्मदा से निम्नलिखित आशीर्वाद की प्रार्थना करते हैं:
- कष्टों से मुक्ति: माँ नर्मदा के आशीर्वाद से जीवन के सभी दुखों और कष्टों से मुक्ति मिलती है।
- समृद्धि और शांति: नर्मदा चालीसा के पाठ से घर में समृद्धि और शांति का वास होता है।
- पापों से मुक्ति: माँ नर्मदा के आशीर्वाद से पापों का नाश होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है।
- आध्यात्मिक उन्नति: नर्मदा माँ के आशीर्वाद से भक्तों को आध्यात्मिक उन्नति और जीवन में सही मार्गदर्शन मिलता है।
नर्मदा चालीसा के लाभ
- कष्टों से मुक्ति: नर्मदा चालीसा का नियमित पाठ करने से व्यक्ति के जीवन के सभी कष्ट समाप्त होते हैं और वह मानसिक शांति प्राप्त करता है।
- धन और समृद्धि: चालीसा का पाठ घर में समृद्धि, धन, और सुख का वास करता है। यह व्यक्ति के जीवन को भौतिक दृष्टिकोण से भी समृद्ध बनाता है।
- पापों का नाश: माँ नर्मदा के आशीर्वाद से पापों का नाश होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है। यह व्यक्ति को आध्यात्मिक उन्नति की दिशा में मार्गदर्शन करती है।
- आध्यात्मिक शांति: नर्मदा चालीसा व्यक्ति के मानसिक तनाव को दूर करने में मदद करती है और उसे आंतरिक शांति और संतुलन प्रदान करती है।
- सफलता और समृद्धि: नर्मदा चालीसा के पाठ से जीवन में सफलता, समृद्धि, और शांति की प्राप्ति होती है। यह व्यक्ति को अपने जीवन में सकारात्मक दृष्टिकोण रखने की शक्ति प्रदान करती है।
नर्मदा चालीसा का पाठ कैसे करें?
नर्मदा चालीसा का पाठ विशेष रूप से सोमवार, शुक्रवार, और शनिवार को किया जाता है, क्योंकि ये दिन माँ नर्मदा की पूजा के लिए विशेष रूप से शुभ माने जाते हैं। हालांकि, इसे किसी भी दिन और किसी भी समय किया जा सकता है।
पाठ करते समय, एक स्वच्छ स्थान पर बैठकर माँ नर्मदा की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक जलाएं। फिर ताजे फूल अर्पित करें और चालीसा का पाठ पूरी श्रद्धा और ध्यान से करें। ध्यान रखें कि पाठ करते समय मानसिक शांति और एकाग्रता बनाए रखें।
नर्मदा चालीसा का महत्व और लाभ
नर्मदा माता को भगवान शिव से आशीर्वाद प्राप्त है कि जो भी भक्त उनकी पूजा अर्चना करेगा और उनके पानी से स्नान करेगा। उसके द्वारा जाने अनजाने में हुए पापो का नाश होता है। इसी के साथ नर्मदा को सुख और आनंद प्रदान करने वाली देवी भी माना जाता है। इसलिए जो भी व्यक्ति माँ नर्मदा के चालीसा का पाठ करता है, तो उसके मन को शांति मिलती है और सभी प्रकार के पापो का नाश होता है।
नर्मदा चालीसा दोहा
देवि पूजित, नर्मदा, महिमा बड़ी अपार।
चालीसा वर्णन करत, कवि अरु भक्त उदार॥
इनकी सेवा से सदा, मिटते पाप महान।
तट पर कर जप दान नर, पाते हैं नित ज्ञान ॥
नर्मदा चालीसा चौपाई
जय-जय-जय नर्मदा भवानी, तुम्हरी महिमा सब जग जानी।
अमरकण्ठ से निकली माता, सर्व सिद्धि नव निधि की दाता।
कन्या रूप सकल गुण खानी, जब प्रकटीं नर्मदा भवानी।
सप्तमी सुर्य मकर रविवारा, अश्वनि माघ मास अवतारा।
वाहन मकर आपको साजैं, कमल पुष्प पर आप विराजैं।
ब्रह्मा हरि हर तुमको ध्यावैं, तब ही मनवांछित फल पावैं।
दर्शन करत पाप कटि जाते, कोटि भक्त गण नित्य नहाते।
जो नर तुमको नित ही ध्यावै, वह नर रुद्र लोक को जावैं।
मगरमच्छा तुम में सुख पावैं, अंतिम समय परमपद पावैं।
मस्तक मुकुट सदा ही साजैं, पांव पैंजनी नित ही राजैं।
कल-कल ध्वनि करती हो माता, पाप ताप हरती हो माता।
पूरब से पश्चिम की ओरा, बहतीं माता नाचत मोरा।
शौनक ऋषि तुम्हरौ गुण गावैं, सूत आदि तुम्हरौं यश गावैं।
शिव गणेश भी तेरे गुण गवैं, सकल देव गण तुमको ध्यावैं।
कोटि तीर्थ नर्मदा किनारे, ये सब कहलाते दु:ख हारे।
मनोकमना पूरण करती, सर्व दु:ख माँ नित ही हरतीं।
कनखल में गंगा की महिमा, कुरुक्षेत्र में सरस्वती महिमा।
पर नर्मदा ग्राम जंगल में, नित रहती माता मंगल में।
एक बार कर के स्नाना, तरत पिढ़ी है नर नारा।
मेकल कन्या तुम ही रेवा, तुम्हरी भजन करें नित देवा।
जटा शंकरी नाम तुम्हारा, तुमने कोटि जनों को है तारा।
समोद्भवा नर्मदा तुम हो, पाप मोचनी रेवा तुम हो।
तुम्हरी महिमा कहि नहीं जाई, करत न बनती मातु बड़ाई।
जल प्रताप तुममें अति माता, जो रमणीय तथा सुख दाता।
चाल सर्पिणी सम है तुम्हारी, महिमा अति अपार है तुम्हारी।
तुम में पड़ी अस्थि भी भारी, छुवत पाषाण होत वर वारि।
यमुना मे जो मनुज नहाता, सात दिनों में वह फल पाता।
सरस्वती तीन दीनों में देती, गंगा तुरत बाद हीं देती।
पर रेवा का दर्शन करके मानव फल पाता मन भर के।
तुम्हरी महिमा है अति भारी, जिसको गाते हैं नर-नारी।
जो नर तुम में नित्य नहाता, रुद्र लोक मे पूजा जाता।
जड़ी बूटियां तट पर राजें, मोहक दृश्य सदा हीं साजें|
वायु सुगंधित चलती तीरा, जो हरती नर तन की पीरा।
घाट-घाट की महिमा भारी, कवि भी गा नहिं सकते सारी।
नहिं जानूँ मैं तुम्हरी पूजा, और सहारा नहीं मम दूजा।
हो प्रसन्न ऊपर मम माता, तुम ही मातु मोक्ष की दाता।
जो मानव यह नित है पढ़ता, उसका मान सदा ही बढ़ता।
जो शत बार इसे है गाता, वह विद्या धन दौलत पाता।
अगणित बार पढ़ै जो कोई, पूरण मनोकामना होई।
सबके उर में बसत नर्मदा, यहां वहां सर्वत्र नर्मदा ।
नर्मदा चालीसा दोहा
भक्ति भाव उर आनि के, जो करता है जाप।
माता जी की कृपा से, दूर होत संताप॥
॥ इति नर्मदा चालीसा समाप्त ॥
निष्कर्ष
नर्मदा चालीसा माँ नर्मदा के आशीर्वाद से जीवन में शांति, समृद्धि, सुख और कष्टों से मुक्ति प्राप्त करने का एक प्रभावी साधन है। यह चालीसा न केवल बाहरी सफलता लाती है, बल्कि यह व्यक्ति को मानसिक शांति, आत्मिक संतुलन और आध्यात्मिक उन्नति भी प्रदान करती है।
नर्मदा चालीसा का पाठ करें और माँ नर्मदा के आशीर्वाद से अपने जीवन को समृद्ध, सुखमय और संतुलित बनाएं।