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विश्वकर्मा चालीसा: भगवान विश्वकर्मा की महिमा और आशीर्वाद

by Satnami Times Team
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विश्वकर्मा चालीसा भगवान विश्वकर्मा के प्रति श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक है, जो रचनात्मकता, निर्माण, और शिल्प कौशल के देवता माने जाते हैं। वे वास्तुकला, निर्माण, और शिल्पकला के ज्ञाता हैं और उन्हें विश्व का सबसे बड़ा वास्तुकार और शिल्पी माना जाता है। भारतीय धर्म और संस्कृति में भगवान विश्वकर्मा का विशेष स्थान है, और उनकी पूजा से व्यक्ति को सफलता, समृद्धि और शिल्पकला में दक्षता प्राप्त होती है।

भगवान विश्वकर्मा का महत्व

भगवान विश्वकर्मा का जन्म देवताओं के आशीर्वाद से हुआ था, और वे देवताओं के विभिन्न महल, हथियार, यंत्र, और अन्य वस्तुएं बनाने के लिए प्रसिद्ध हैं। उनका कार्यक्षेत्र विशेष रूप से निर्माण, कला और विज्ञान से जुड़ा हुआ है। उनके द्वारा बनाए गए भव्य महल, यंत्र और अस्त्र-शस्त्र की कहानियां हिंदू पुराणों में मिलती हैं। उन्हें सृष्टि के निर्माता के रूप में पूजा जाता है, और उनके आशीर्वाद से किसी भी निर्माण कार्य में सफलता मिलती है।

विश्वकर्मा जी के आशीर्वाद से न केवल निर्माण कार्यों में सफलता मिलती है, बल्कि यह व्यक्ति के जीवन में समृद्धि, मानसिक शांति और शारीरिक बल भी लाता है। उनकी पूजा से सभी तरह के संकटों और परेशानियों से मुक्ति मिलती है।

विश्वकर्मा चालीसा का अर्थ

विश्वकर्मा चालीसा में भगवान विश्वकर्मा के अद्भुत गुणों और उनके द्वारा किए गए कार्यों का वर्णन किया गया है। यह चालीसा भगवान विश्वकर्मा के रचनात्मक कौशल, उनकी शक्ति और उनकी प्रेरणादायक कार्यों का बखान करता है। इसमें उनके भक्तों के लिए शुभकामनाएं और आशीर्वाद की प्रार्थना की जाती है।

इस चालीसा के श्लोकों में भगवान विश्वकर्मा से निम्नलिखित आशीर्वाद की प्रार्थना की जाती है:

  • सफलता प्राप्ति: भगवान विश्वकर्मा के आशीर्वाद से व्यक्ति अपने कार्यों में सफलता प्राप्त करता है।
  • निर्माण और शिल्प कौशल में निपुणता: भगवान विश्वकर्मा के आशीर्वाद से निर्माण और शिल्पकला में दक्षता मिलती है।
  • शांति और समृद्धि: विश्वकर्मा जी के आशीर्वाद से जीवन में शांति, समृद्धि और संतुलन आता है।
  • कष्टों से मुक्ति: भगवान विश्वकर्मा की पूजा से जीवन के सभी संकट और समस्याओं का समाधान होता है।

विश्वकर्मा चालीसा के लाभ

  1. निर्माण कार्यों में सफलता: विश्वकर्मा चालीसा का पाठ करने से कोई भी निर्माण कार्य सफलतापूर्वक पूरा होता है। चाहे वह घर का निर्माण हो, वाहन की मरम्मत हो, या अन्य किसी निर्माण कार्य से संबंधित हो।
  2. शिल्पकला में दक्षता: यदि आप किसी कला, शिल्प या किसी तकनीकी क्षेत्र से जुड़े हैं, तो भगवान विश्वकर्मा की पूजा और चालीसा का पाठ आपको अपनी कला में निपुणता और सफलता दिला सकता है।
  3. समृद्धि और शांति: चालीसा का पाठ व्यक्ति के जीवन में समृद्धि और शांति का वास करता है। यह उसे सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक शांति प्रदान करता है।
  4. कष्टों से मुक्ति: भगवान विश्वकर्मा के आशीर्वाद से जीवन के कष्ट और परेशानियां दूर होती हैं। यह चालीसा मानसिक संतुलन और आत्मविश्वास बढ़ाती है।
  5. सिद्धि प्राप्ति: विश्वकर्मा जी के आशीर्वाद से व्यक्ति अपने कार्यों में सफलता प्राप्त करता है और उसे नये अवसर मिलते हैं।

विश्वकर्मा चालीसा का पाठ कैसे करें?

विश्वकर्मा चालीसा का पाठ विशेष रूप से गुरुवार और शनिवार को किया जाता है, क्योंकि ये दिन भगवान विश्वकर्मा के पूजा के लिए शुभ माने जाते हैं। हालांकि, इसे किसी भी दिन और किसी भी समय किया जा सकता है।

पाठ करते समय, एक स्वच्छ स्थान पर बैठकर भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक जलाएं और ताजे फूल अर्पित करें। फिर पूरी श्रद्धा और ध्यान से चालीसा का पाठ करें। ध्यान रखें कि पाठ करते समय मानसिक शांति और एकाग्रता बनाए रखें।

विश्वकर्मा चालीसा का महत्व

शास्त्रों और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अगर कोई व्यक्ति रोज भगवान विश्वकर्मा जी की चालीसा का पाठ करता है तो सुख सौभाग्य में वृद्धि होती है। वहीं विश्वकर्मा चालीसा की कृपा से जातक को धन-बल और ज्ञान-विवेक की प्राप्ति भी होती है। विश्वकर्मा चालीसा के प्रभाव से व्यापार में वृद्धि होती है और वह हर सुख का भागीदार बनता है, उसे किसी भी प्रकार का कोई कष्ट नहीं होता है। तो आइए पढ़ते है विश्वकर्मा चालीसा।

विश्वकर्मा चालीसा दोहा

श्री विश्वकर्म प्रभु वन्दऊं, चरणकमल धरिध्यान।

श्री, शुभ, बल अरु शिल्पगुण, दीजै दया निधान॥

विश्वकर्मा चालीसा चौपाई

जय श्री विश्वकर्म भगवाना।

जय विश्वेश्वर कृपा निधाना॥

शिल्पाचार्य परम उपकारी।

भुवना-पुत्र नाम छविकारी॥

अष्टमबसु प्रभास-सुत नागर।

शिल्पज्ञान जग कियउ उजागर॥

अद्‍भुत सकल सृष्टि के कर्ता।

सत्य ज्ञान श्रुति जग हित धर्ता॥

अतुल तेज तुम्हतो जग माहीं।

कोई विश्व मंह जानत नाही॥

विश्व सृष्टि-कर्ता विश्वेशा।

अद्‍भुत वरण विराज सुवेशा॥

एकानन पंचानन राजे।

द्विभुज चतुर्भुज दशभुज साजे॥

चक्र सुदर्शन धारण कीन्हे।

वारि कमण्डल वर कर लीन्हे॥

शिल्पशास्त्र अरु शंख अनूपा।

सोहत सूत्र माप अनुरूपा॥

धनुष बाण अरु त्रिशूल सोहे।

नौवें हाथ कमल मन मोहे॥

दसवां हस्त बरद जग हेतु।

अति भव सिंधु मांहि वर सेतु॥

सूरज तेज हरण तुम कियऊ।

अस्त्र शस्त्र जिससे निरमयऊ॥

चक्र शक्ति अरू त्रिशूल एका।

दण्ड पालकी शस्त्र अनेका॥

विष्णुहिं चक्र शूल शंकरहीं।

अजहिं शक्ति दण्ड यमराजहीं॥

इंद्रहिं वज्र व वरूणहिं पाशा।

तुम सबकी पूरण की आशा॥

भांति-भांति के अस्त्र रचाए।

सतपथ को प्रभु सदा बचाए॥

अमृत घट के तुम निर्माता।

साधु संत भक्तन सुर त्राता॥

लौह काष्ट ताम्र पाषाणा।

स्वर्ण शिल्प के परम सजाना॥

विद्युत अग्नि पवन भू वारी।

इनसे अद्भुत काज सवारी॥

खान-पान हित भाजन नाना।

भवन विभिषत विविध विधाना॥

विविध व्सत हित यत्रं अपारा।

विरचेहु तुम समस्त संसारा॥

द्रव्य सुगंधित सुमन अनेका।

विविध महा औषधि सविवेका॥

शंभु विरंचि विष्णु सुरपाला।

वरुण कुबेर अग्नि यमकाला॥

तुम्हरे ढिग सब मिलकर गयऊ।

करि प्रमाण पुनि अस्तुति ठयऊ॥

भे आतुर प्रभु लखि सुर-शोका।

कियउ काज सब भये अशोका॥

अद्भुत रचे यान मनहारी।

जल-थल-गगन मांहि-समचारी॥

शिव अरु विश्वकर्म प्रभु मांही।

विज्ञान कह अंतर नाही॥

बरनै कौन स्वरूप तुम्हारा।

सकल सृष्टि है तव विस्तारा॥

रचेत विश्व हित त्रिविध शरीरा।

तुम बिन हरै कौन भव हारी॥

मंगल-मूल भगत भय हारी।

शोक रहित त्रैलोक विहारी॥

चारो युग परताप तुम्हारा।

अहै प्रसिद्ध विश्व उजियारा॥

ऋद्धि सिद्धि के तुम वर दाता।

वर विज्ञान वेद के ज्ञाता॥

मनु मय त्वष्टा शिल्पी तक्षा।

सबकी नित करतें हैं रक्षा॥

प्रभु तुम सम कृपाल नहिं कोई।

विपदा हरै जगत मंह जोई॥

जै जै जै भौवन विश्वकर्मा।

करहु कृपा गुरुदेव सुधर्मा॥

इक सौ आठ जाप कर जोई।

छीजै विपत्ति महासुख होई॥

पढाहि जो विश्वकर्म-चालीसा।

होय सिद्ध साक्षी गौरीशा॥

विश्व विश्वकर्मा प्रभु मेरे।

हो प्रसन्न हम बालक तेरे॥

मैं हूं सदा उमापति चेरा।

सदा करो प्रभु मन मंह डेरा॥

विश्वकर्मा चालीसा दोहा

करहु कृपा शंकर सरिस, विश्वकर्मा शिवरूप।

श्री शुभदा रचना सहित, ह्रदय बसहु सूर भूप॥

निष्कर्ष

विश्वकर्मा चालीसा भगवान विश्वकर्मा के आशीर्वाद से हर निर्माण कार्य में सफलता, शिल्पकला में दक्षता, और जीवन में समृद्धि प्राप्त करने का एक प्रभावी साधन है। यह चालीसा न केवल बाहरी कार्यों में सफलता लाती है, बल्कि यह व्यक्ति के मानसिक और आध्यात्मिक विकास में भी मदद करती है। भगवान विश्वकर्मा के आशीर्वाद से जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं, और हर कष्ट और परेशानी से मुक्ति मिलती है।

विश्वकर्मा चालीसा का पाठ करें और भगवान विश्वकर्मा के आशीर्वाद से अपने जीवन को समृद्ध और सफल बनाएं।


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